भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

सपने में / गगन गिल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सपने में

मिली

उससे


गिरी जाकर

कुएँ में


सपने में


अब अगर
मिले
कोई रस्सी


सपने में


तो आए
वह बाहर?