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सपनों का घर गिर जायेगा अन्देशा है / ओम प्रकाश नदीम

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सपनों का घर गिर जाएगा अन्देशा है
वादे से वो फिर जाएगा अन्देशा है

मेरी तौबा के सूरज पर उसका रुख़
बादल बन कर घिर जाएगा अन्देशा है

ख़ुद्दारी ज़ख़्मी लेकर लौटा है लेकिन
लत फिर लत है फिर जाएगा अन्देशा है

घर तो बन जाएगा लेकिन जाने क्या क्या
दीवारोँ में घिर जाएगा अन्देशा है

ऊँचाई पर जाने का जो ढंग है उसका
रस्ते में ही गिर जाएगा अन्देशा है