भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सबके आगे नहीं बिखरना है / विकास शर्मा 'राज़'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सबके आगे नहीं बिखरना है
अब जुनूँ और तर्ह करना है

क्या ज़रूरत है इतने ख़्वाबों की
दश्त-ए-शब पार ही तो करना है

आ गए ज़िन्दगी के झाँसे में
ठान रक्खा था आज मरना है

पूछना चाहिए था दरिया को
डूबना है कि पार उतरना है

बैंड-बाजा है थोड़ी देर का बस
रात भर किसने रक़्स करना है