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सब्ज़ बागों के फ़रेबात के सिवा क्या है / विनय कुमार

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सब्ज़ बागों के फ़रेबात के सिवा क्या है
आपके शहर के हालत में हरा क्या है।

ग़ैर के खून में उंगली डुबाये बैठे हैं
चंद लफ़्ज़ों के सिवा सुर्ख़ आपका क्या है।

चोर के पांव सिपाही की तरह लगते हैं
रास्ते पूछ रहे हैं कि रास्ता क्या है।

मैं अभी तुमसे मुखातिब हूँ बताओ क्या हो
ख़ुदा मिलेगा तो पूछूंगा कि ख़ुदा क्या है।

सवाल आग से पूछा था क्या जलाते हो
जवाब राख से आया है कि जला क्या है।