भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सब केरा भैंसिया मलहा पार उतारि देलै / अंगिका

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सब केरा भैंसिया मलहा पार उतारि देलै
हमरो हे भैंस उसरे में मझाई
जब हमें आगे सुन्नरि
पार देबौ उतारि गे तोहरे भैंसिया
सुन्नरि गे हमरा के की देबै इलाम
जब हम आरे मलहा
बसबै सासु रे ररियाऽ
छोटकी रे ननद तबै देबौ इलाम
छोटकी ननदिया हे सुन्नरि
हमरो लागे बहिनियां
कइसे हे लेबौ इलाम
साँचल तोर यौवन देखि
होइछै मन अधीर
हमरो जे यौवन विष के अगोरल
मलहा रे छुबते मरि जयबे रे ।