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सब के वरदिया कोसीमाय / अंगिका

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सब के वरदिया कोसीमाय
पार उतरि गेलै,
हमरो हे बरद कोसीमाय
उसरे में मझाई हे हमरो बदर ।
जब हम आगे बहिना पार देवी
उतारि गे तोहरो बरद
बहिना गे हमरा के की देवे इनाम ।
जब हम आहे मलहा बसबै ससुररिया,
तब छोटकी ननदी देवौ इनाम रे मलहा
छोटकी ननदिया हे कोसीमाय देवौ इनाम ।
छोटकी ननदिया वहिना
हमरो हे वहिनिया हे
कैसे कोसीमाय लेबौ इनाम हे ।
कोसीमाय सांचले हे यौवन
हमरो यौवन हे कोसी माय
विष के अगोरल
मलहा छुबैत मरि जेबै रे ।।