भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सब मेरे हम सफ़र कहानी में / राज़िक़ अंसारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सब मेरे हम सफ़र कहानी में
हो गये दर ब दर कहानी में

बीच में इक लकीर नफ़रत की
हम इधर तुम उधर कहानी में

ख़ूब कैंची चलाई है तुम ने
मेरे किरदार पर कहानी में

कीजिए मत हमें नज़र अंदाज़
हम हैं मौजूद हर कहानी में

मीर ज़ाफर बदल बदल के लिबास
हो गये मौअतबर कहानी में

मत समझ लेना बे ज़बान हमें
हम हैं ख़ामोश गर कहानी में