भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

समधिन तोहार जोड़ा, बलइयां लीह / रसूल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

समधिन तोहार जोड़ा, बलइयां लीह ।
समधिन हो तनी समधी के दीह,
समधीन हो तनी समधी के दीह,
समधी चढ़न जोगे घोड़ा ।
बलइयां लीह।

सरहज हो तनी नौसे के दीह,
सरहज हो तनी नौसे के दीह,
अशरफी भरा-भर तोड़ा[1]
बलइयां लीह ।

पड़ोसन हो सहबलिया के दीह,
पड़ोसन हो सहबलिया के दीह,
दूध पिअन जोग खोरा ।
बलइयां लीह ।

कहत रसूल सब बरिअतिया के दीह,
कहत रसूल सब बरिअतिया के दीह,
पिअरी रंगा-रंग जोड़ा ।
बलइयां लीह ।

शब्दार्थ
  1. बटुआ