भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

समय कष्ट में यदि गुजारा न होता / रंजना वर्मा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

समय कष्ट में यदि गुजारा न होता।
मिला साँवरे का सहारा न होता॥

भँवर में ही कश्ती हमारी भटकती
कन्हैया ने गरचे उबारा न होता॥

सुनी नीति की बात होती जो तुमने
कभी सत्य का पथ नकारा न होता॥

सुनाता न रणभूमि में श्याम गीता
सुयोधन कभी युद्ध हारा न होता॥

न बहते नयन गोपियों के जो इतने
कभी आब सागर का खारा न होता॥