भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
समय को नाथ ! / शशिकान्त गीते
Kavita Kosh से
हिन्दी शब्दों के अर्थ उपलब्ध हैं। शब्द पर डबल क्लिक करें। अन्य शब्दों पर कार्य जारी है।
नाथ !
समय को नाथ !
रस्सी छोडे़
सरपट घोडे़
बदल रहे हैं
पाथ !
कीला टूटा
पहिया छूटा
नहीं
कैकयी साथ !
जीत कठिन है
बडा़ जिन्न है
झुका न ऐसे
माथ !