भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

समरपण / मणि मधुकर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आतमां रै सांच री ज्यूं
अणघड़ उछाव
नै
उजास रै उणियार री ज्यूं धवळौ
औ हंसौ
चुगै
ऊंडा समंद-सरोवरां रा
मोत्यां बिचला आखर
अर जद
खोलै
आपरा पवनगत पंख
तौ लांघै सिरजण-सामरथ रा
अलंघ-अणसुण्या भाखर!

जिण री मुळक सूं
मिनखापण माथै विसास रा फूल झड़ै
नै दुखां रा दाव मंगसा पड़ै
अगम पंथां रौ
औ एक अळगौ जातरी!

इण ओळियां री ओळखांण साथै
ऐ कवितावां
हेताळू हाथां में!