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सरकार / विजय चोरमारे / टीकम शेखावत

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1.
सरकार कोई भी हो
मुम्बई की या फिर दिल्ली की
कार्यशैली होती है एक ही सरकार की।

हवाई सर्वेक्षण के बिना
नहीं समझती वह ग्राउण्ड रियलिटी।

उनका पैकेज नहीं होता फलित
अर्थी शमशान पहुँचने तक।

2.

मेलघाट में मरे बच्चे कुपोषण से
या
रालेगन का बुढ़ऊ बैठ जाए अनशन के लिए,
तब भी
सरकार के गले में नहीं अटकता निवाला।

पानी गले तक आ जाए तब भी सरकार
रोकथाम नहीं करती
सूखे के समय
सरकार कभी कुँए में नहीं झांकती
बाढ़ के समय भी सरकार की
नय्या कभी नहीं डूबती !

सरकार के घर में
रोज़ ही होती है मारामारी, उठा-पटक
अपमानित करना व एक दूजे पर उछालना कीचड़
रहता है जारी

सरकार का सब घाटे का व्यापार
सरकार की खेती मतलब कपास और प्याज
सरकार के गन्ने में भी
ग़ायब चीनी की मिठास

एक भी परीक्षा ढंग से होती नहीं पास
फिर भी
क्यों नहीं करती सरकार आत्महत्या ?

मूल मराठी से अनुवाद — टीकम शेखावत