भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सरग भवन्ति हो गिरधरनी एक सन्देशो लई जाव / निमाड़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सरग भवन्ति हो गिरधरनी, एक सन्देशो लई जाव।।
सरग का अमुक दाजी खऽ यो कयजो,
तुम घर अमुक को ब्याव।।
जेम सरऽ ओमऽ सारजो हो, हमारो तो आवणोनी होय।।
जड़ी दिया बज्र किवाड़, अग्गळ जड़ी जड़ी लुहा की जी।।