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सरहद से लौटते हुए / मनोहर बाथम

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तुम अपनी सरहद को
पाक कहते हो
मैं भी

दोनों की है यह एक

यह प्यार करना नहीं सिखाती
माँ की तरह

बाँटती है

हरदम सोचता हूँ मैं
सरहद से लोटते हुए