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सर्द रातों में दिल मचलता है / कर्नल तिलक राज

सर्द रातों में दिल मचलता है
दिल में ग़म करवटें बदलता है।

झूठे सपनों में रात बीती है
जाग जाऊँ कि दिन निकलता है।

क्यों फ़िज़ा में है कँपकपी तारी
कौन मन को मेरे मसलता है।

तुम जो आओ तो रोशनी फैले
वरना सूरज तो रोज़ ढलता है।