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सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो / ओम प्रकाश नदीम

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सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो ।
हर बात पे ये मत कहो शमशीर निकालो ।

हालात पे रोने से फ़क़त कुछ नहीं होगा,
हालात बदल जाएँ वो तदबीर निकालो ।

देखूँ ज़रा कैसा था मैं बेलौस[1] था जब तक,
बचपन की मेरे कोई सी तस्वीर निकालो ।

सय्याद[2] को सरकार सज़ा बाद में देना,
पहले मेरे सीने में धँसा तीर निकालो ।

दुनिया मुझे हैवान समझने लगी, अब तो,
गर्दन से मेरी धर्म की ज़ंजीर निकालो ।

शब्दार्थ
  1. निश्छल
  2. बहेलिया