भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सलाम / ओम प्रकाश नदीम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गर न होते राहबर राह-ए-सदाक़त के हुसैन ।
मर्तबा शायद शहादत का नहीं पाते हुसैन ।

पानी-पानी आज तक है दोस्तो जू-ए-फ़रात,
क्योंकि उसके पास रह कर भी रहे प्यासे हुसैन ।

इक हिसार-ए-क़ौमियत में क़ैद मत रक्खो ये नाम,
फैलने दो ताकि दुनिया जान ले क्या थे हुसैन ।

ख़ुद रहे प्यासे पिलाया दुश्मनों को अपना ख़ून,
दो क़दम ईसार से भी बढ़ गए आगे हुसैन ।

बुतपरस्ती को अगर माना' नहीं होता ’नदीम’,
बुत बना कर रोज़ तेरे पाँव हम छूते हुसैन ।