भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सलोने रूप का 'दरपन' / राजेन्द्र गौतम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लिए आया
चैत की परछाइयाँ
फिर धूप का 'दरपन' ।

फिर समर्पण
को विवश ये
ऋतुमती मुग्धा हवाएँ हैं
सृजन का संकल्प ले आईं
सभी प्रमदा दिशाएँ हैं
प्यास के
प्रतिबिम्ब-सा थिरका
सलोने रूप का 'दरपन' ।

अमलतासी स्वप्न-से
सब हो गए पूजन
यों अटारी
से कपोतों के झरें कूजन
फिर हरे शहतूत की
डालें झुकीं
फिर कूप का 'दरपन' ।