भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

साँवन के सहनइया भदोइया के किच-किच ए / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

साँवन के सहनइया[1] भदोइया[2] के किच-किच[3] ए।
सुगा-सुगइया[4] के पेट,[5] बेदन[6] कोई न जानये हे।
सुगा-सुगइया के पेट, कोइली दुख जानये हे॥1॥
अँगना बहारइत चेरिया, त सुनहऽ बचन मोरा हे।
चेरिया, मोरा परभु बइठल बँगलवा,[7] से जाइके बोलाइ देहु हे॥2॥
जुगवा[8] खेलइते[9] तोंहों बबुआ, त सुनहऽ बचन मोरा हे।
बबुआ, रउरे धनि दरदे बेयाकुल, रउरा के बोलाहट[10] हे॥3॥
पसवा त गिरलइ[11] बेल तर,[12] अउरो[13] बबूर तर हे।
ललना, धाइ[14] पइसल गजओबर,[15] कहऽ धनि कूसल हे॥4॥
डाँड़ मोरा फाट हे कसइली जाके, ओटिया[16] चिल्हकि[17] मारे हे।
परभुजी, बारह बरिसे मइया रूसल, सेहो बउँसी लाबह[18] हे॥5॥
मचिया बइठल तोहें मइया, त सुनहऽ बचन मोरा हे।
मइया, तोर पुतहू[19] दरद बेयाकुल, तोरा के बोलाहट हे॥6॥
तुहूँ त हऽ मोर बबुआ, त रउरो बंसराखन[20] हे।
बबुआ, तोर धनि बचन कुठार, बोलिया करेजे साले हे॥7॥
सउरिया[21] बइठल तोहें धनिया त सुनहऽ बचन मोरा हे।
धनि, बारह बरिस मइया रूसल, कहल नहिं मानये हे॥8॥
लेहु परभु नाक के बेसरिया[22] त मइया के समद[23] दहु हे।
परभुजी, बारहे बरिस चाची रूसल, उनखे[24] समद दहु हे॥9॥
मचिया बइठल तोहे चाची, त सुनहऽ बचन मोरा हे।
चाची, तोर पुतहू दरद बेयाकुल, तोरा के बोलाहट हे॥10॥
सामन[25] के समनइया[26] तो, भादो के किच-किच हे।
बबुआ, वह हकइ[27] पुरबा से पछेया, जड़इया[28] मोरा लागये हे॥11॥
घड़ी रात गेलइ पहर रात होरिला जलम लेल हे।
ललना, बज लगल अनन्द बधावा, महल उठे सोहर हे॥12॥
अँगना बहारइत चेरिया त सुनहऽ बचन मोरा हे।
चेरिया, झट दए बाँटऽन[29] सोंठउरा[30] से होरिला जलम लेल हे॥13॥

शब्दार्थ
  1. शहनाई। सावन की रिमझिम, दादुर, मोर, पपीहे, झींगुर आदि की सम्मिलित ध्वनि के लिए शहनाई शब्द का प्रयोग किया गया है। कहीं-कहीं ‘सहनाइया’ की जगह पर ‘समनइया’ भी आया है। भी.आ. गी. में ‘सवनइया’ पाठ है। ‘सवनइया’ या ‘समनइया’ का तात्पर्य है-‘सावनी समाँ
  2. भाद्र मास
  3. कीच-काच
  4. शुक-शुकी
  5. गर्भ
  6. वेदना
  7. बँगला में
  8. जुआ
  9. खेलते हुए
  10. बुलावा
  11. गिर गया
  12. बिल्व वृक्ष के नीचे
  13. और
  14. दौड़कर
  15. चुहान, प्रसूति गृह
  16. उदर के नीचे का पेडू वाला भाग
  17. सूल की तरह रह-रहकर दर्द करना
  18. मना लाओ
  19. पताहू, वधू
  20. वंशरक्षक
  21. प्रसूति गृह
  22. नकबेसर, नाक का एक आभूषण
  23. समदना, मनना
  24. उनको
  25. श्रावण
  26. सावनी समाँ
  27. बह रही है
  28. जाड़ा
  29. बाँटो न
  30. एक प्रकार का लड्डू, जो सोंठ, चावल के आटे आदि से बनता है, जो प्रसूति को खाने के लिए दिया जाता है तथा पड़ोसियों में बाँटा जाता है