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साईं छप्प तमाशे नूँ आया / बुल्ले शाह

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साईं छप्प तमाशे नूँ आया।
सईओ रत्न मिल नाम ध्यावो।

लटक सजण दी नाहीं छपदी,
सारी खलकत सिकदी तपदी।
सईओ रत्न मिल नाम ध्यावो,
साईं छप्प तमाशे नूँ आया।

रल मिल सईओ कत्तण पावो,
इक बेई[1] दा विच्च समावो।
तुसीं गीत पीआ दे गावो,
साईं छप्प तमाशे नूँ आया।

बुल्ला बात अनोखी एहा,
नच्चण लग्गी ते घुँघट केहा।
तुसीं पड़दा अक्खीं थीं लाहवो,
साईं छप्प तमाशे नूँ आया।

शब्दार्थ
  1. औरत