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साक्षी / विमलेश शर्मा

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विदा और मिलन
की साक्षिणी आँखें हुआ करती हैं
वे ही पहचानती है उसे पहले-पहल
जो जाने कौन जन्म में
आत्मा का हिस्सा रहा होगा!