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सागर-भोर / बलदेव वंशी

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अम्बर में ऊपर-ऊपर बरसता
सुरमई काजल !
उंसासों-क्लेशों-हिचकोलता ललछौंहा
छलल-छलल कुछ कहने को आतुर
सागर । जल...