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साज़िश / कुमार विकल

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आप मेरे ख़िलाफ़ साज़िश करेंगे तो मेरा क्या कर लेंगे?

इस सफ़र पर निकलने से पहले

मैने अपना स्वप्न-घर

आँखों से निकाल कर

अपनी हथेली पर धर लिया था

और एक फ़ैसला कर लिया था

कि मेरे पास खोने के लिए सिर्फ़ एक उनींदी दुनिया है

जबकि आपके पास नींद है

नींद के महल हैं

सुरक्षा की जागीरें हैं।

आप मेरे ख़िलाफ़ साज़िश कर भी लेंगे

तो अधिक से अधिक

मेरी हथेली पर खड़े एक स्वप्न-घर को गिरा देंगे

लेकिन

मैं आपके नींद महल की दीवारें हिला दूँगा।

इसलिए आप मेरे ख़िलाफ़ साज़िश करते हैं

दरअसल आप मुझ से नहीं

उस आग से डरते हैं

जो मेरी दियासलाई की डिबिया में बंद है।

आप जानते हैं

इस दियासलाई से केवल

एक स्वप्न-घर की लालटेन नहीं जलती

हज़ारों लाखों घरों की लालटेनें जलती हैं

करोड़ों बीड़ियाँ सुलगती हैं

आप एक साथ जलती

लाखों लालटेनों

और करोड़ों सुलगती बीडि़यों से बहुत डरते हैं

इसलिए आप मेरी दियासलाई की डिबिया के ख़िलाफ़ साज़िश करते हैं।