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साफ़ शफ़्फ़ाफ़ अब हैं हम लोग / राजेंद्र नाथ 'रहबर'
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साफ़, शफ़्फाफ़ आब हैं हम लोग
आइनों का जवाब हैं हम लोग
चाक कर दें जिगर अंधेरों का
साहिबे-आबो-ताब हैं हम लोग
हो सके तो मुतालआ करना
एक उम्दा किताब हैं हम लोग
क्या हमारा जवाब लाओगे
आप अपना जवाब हैं हम लोग
काम हम ने किये हैं लाफ़ानी
यूं तो मिस्ले-हबाब हैं हम लोग
बह रहा है जो अपनी मस्ती में
ऐसे दरिया का आब हैं हम लोग