भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

सायकल पर सवार कुनबा / रजत कृष्ण

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिन्दी शब्दों के अर्थ उपलब्ध हैं। शब्द पर डबल क्लिक करें। अन्य शब्दों पर कार्य जारी है।

सायकल पर सवार
एक पूरा का पूरा कुनबा यह
बहुत कुछ कहता है !

अपने ही देश में
ख़ानाबदोश घूमते
ऐसे न जाने कितनें होंगे
हो चुके दफ़न कितने
काल की गति में !

यह वे नहीं
जिन्हें जानता हो कोई पटवारी
ना ही पता इन्हें
क्या होता पत्ता..परचा
क्या नक़्शा..खसरा
पुरखों की ज़मीन का....
जो बखत पड़े पर
अपनी पहचान साबित करने के
काम आवे !

यह जानते तो फ़क़त यही
कि बित्ते भर पेट की ख़ातिर
लाँघनी होती रोज़...रोज़
सड़कें लम्बी ..गहरी खाई !

नहीं होता पोस्ट ..मुकाम
अपना इनका
पहुँचे जहाँ कुशल...
क्षेम की चिट्ठी-पत्री कोई !

गोड़ से मूड़ तक
अनचिन्हारी में डूबे
न जाने कितने हैं ऐसे
जो कब आए इस धरती पर
और काल की गति नाप
कब चले गए कहीँ ..
न हमें पता, न पता तुम्हें !!