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सारे रंगों वाली लड़की-3 / भरत तिवारी

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सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

वहाँ हो
यहाँ हो
मेरी तरह
हमारे बादलों को भी
बिना बताए ही चली गई
जो तुम गई तो खूब बरसे
जो उसके बाद नहीं ही बरसे

बड़े भालू बादल ने बताया था
जब मैं तुम्हें प्यार कर रहा होता हूँ
बादल बूँदें इक्ट्ठी कर रहा होता है
हमारी गर्मी से
बरस जाता है
तपती सड़क पर

पानी का भ्रम होता है
इन्द्रधनुष नहीं –––
सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?
इंद्रधनुष के किसी छोर पर
पानी बरसे
तब धूल छँटे ।