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सीकिया चीरिए चीरिए बँगला छवावल / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सीकिया[1] चीरिए चीरिए[2] बँगला छवावल।
ठोपे ठोपे[3] चुअहे[4] गुलाब, से ठोपे ठोपे॥1॥
सेहो[5] अरक[6] के पगड़ी रँगाबल।
पेन्हें जी होरिलवा के बाप, उनखा[7] के होरिला भयले॥2॥
हम त एहो परभु, गरभ से बेयाकुल।
तूँ चढ़ि पलँगा बइठबऽ मन मार॥3॥
तूँ त चलिए जयबऽ[8] राजा कचहरिआ[9]
हम हीं बुझब, सभ लोग॥4॥

शब्दार्थ
  1. सींक
  2. चीर-चीरकर
  3. बूँद-बूँद
  4. चूता है
  5. उसी
  6. अर्क, रस
  7. उनको
  8. जाओगे
  9. कचहरी