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सीमा शुल्क अधिकारी / आर्थर रैम्बो / मदन पाल सिंह

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कुछ लोग तो कहते हैं : ख़ुदा के वास्ते ... उफ़ ! या ख़ुदा !
और कुछ कहते हैं : कुछ भी नहीं है ! ...दोज़ख में जाओ लानती !
चाहे सैनिक हों या नाविक, राज्य के अधम कर्मचारी या हों पेंशनयाफ़्ता
सब बेकार हैं, अपना बदतर वज़ूद लिए – सीमा शुल्क कर्मचारियों के सामने
जो करते रहते हैं कतर-ब्योंत सुदूर तक, अपनी कुल्हाड़ी के घातक वार से ।

मुँह में पाइप लिए, छुरी हाथ में थामे, भावहीन, बेपरवाह चाकर,
और जब जंगल में छाने लगता है अन्धेरा, तब ये जारज़ जाते हैं
बड़े-बड़े चापलूस कुत्तों को लिए हुए
निभाने के लिए अपने भयंकर धतकर्म ।

वे बख़ान करते हैं नए क़ायदे-कानून और तजवीजों का
भोले-भाले बेचारे अनपढ़ों के लिए,
और होते हैं बगलगीर शैतान से, पाने के लिए ताक़त ओ रुतबा
वे शैतान को सौंप देते हैं अपने ज़मीर (१)
मीनमेख निकालकर कहते हुए :
'यह नहीं वह, पुराना कर !! माल के गट्ठर-पोटली जमा करो।'

और जब शान्त होकर चुंगी अधिकारी करता है जाँच युवाओं की
वह हो जाता है, जब्तशुदा माल के क़रीब,
तब अपचारी पड़ जाते हैं नारकीय मुसीबत में
जिनका टटोला था उसने माल-असबाब !!

मूल फ़्रांसीसी भाषा से अनुवाद : मदन पाल सिंह

इस कविता के लिए अनुवादक की टिप्पणी

(सीमा शुल्क अधिकारी (फ्रांसीसी कस्टम अधिकारियों या चुंगी अधिकारियों पर यह कविता है, जिन्हे फ़्रांस में Les douaniers कहते हैं। यहाँ अर्थ को और स्पष्ट करने के लिए कुछ शब्द बढ़ाए गए हैं। कविता की मूल भावना सुरक्षित है। रैम्बो ओर उनका दोस्त पॉल देमिनी बेल्जियम से तमाखू लाते हुए इनसे टकराए थे)

(१) यहाँ प्रसिद्ध जर्मन कथा नायक फ़ॉस्ट के प्रतीक का उल्लेख है, जो अपनी महत्वकाँक्षाओं की पूर्ति तथा शक्ति और सफलता हासिल करने के लिए अपने आदर्श और नैतिकता को शैतान (Diavolo) के पास छोड़ देता है।