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सुआ गीत-3 / छत्तीसगढ़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

तरी नरी नहा नरी नही नरी ना ना रे सुअना
तुलसी के बिरवा करै सुगबुग-सुगबुग
रे सुअना
नयना के दिया रे जलांव
नयनन के नीर झरै जस औरवांती
रे सुअना
अंचरा म लेहव लुकाय
कांसे पीतल के अदली रे बदली
रे सुअना
जोड़ी बदल नहि जाय