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सुख अपनाय लेली दुःख बिसराय दहौ / अनिल शंकर झा

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सुख अपनाय लेली दुःख बिसराय दहौ
हंसी-खुशी राग-रंग मन में बसाय केॅ।
जेकरा सें भेदभाव तेकरहो सखा के भाव
अद्भूत प्रेम दहौ गला सें लगाय केॅ।
हसथौ दिशा दिगंत नाचथौ जुवा वसंत,
बहथौ हवा सुगंध मन हरसाय केॅ।
खेलथौ किशोरी कली प्रेम नेह में ही पली
रसिक मुरारी संगें मधु मुसकाय केॅ॥