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सुना है आँखों से निःसृत शंखनाद को / रश्मि प्रभा

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चाँद के गांव से
किरणों के पाजेब डाल
जब सूरज निकलता है
तब चिड़ियों के कलरव से
मैं मौन आरती करती हूँ
- हर जाग्रत दिशाओं की
जाग्रत भावनाओं की
जाग्रत क़दमों की .......
कभी सुना है आँखों से निःसृत शंखनाद को ?
......
अविचल पलकें
आँखों के मध्य से
जब दुआओं का अभिषेक करती हैं
तब दसों दिशाएं गूंजती हैं
तब तक ...... जब तक किरणों के पाजेब के स्वर
मद्धम न होने लगें
रात लोरी न गाने लगे .....
और पंछी अपने पंख न समेट लें !