Last modified on 30 नवम्बर 2016, at 14:01

सुन्दर सबकुछ / रूप रूप प्रतिरूप / सुमन सूरो

सुन्दर सबकुछ, सुन्दर प्यारोॅ!
काँटोॅ-फूल-कली सें सजलोॅ,
धरती के कण-कण मनियारोॅ!

हिरदय सें प्रेमोॅ के धारा,
तोड़ी बहलै कूल-किनारा,
प्रभु के अजगुत रचना देखी,
मन उद-बुद छन-छन मतबारोॅ!

सागर लहरें गीत सुनाबै,
प्रतिधुनि में पत्थर मुस्काबै,
रूपराशि-भरलोॅ जड़-चेतन,
अहरह पारै एक हँकारोॅ!

मधुमय जोत सरङ सें आबै,
जीवन के अणु-अणु सहलाबै,
सिरजन के संगीत बनी केॅ,
मेघ उमड़लै कारोॅ-कारोॅ!
सुन्दर सबकुछ, सुन्दर-प्यारोॅ!