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सूरज को तुम करो प्रणाम / सरोजिनी कुलश्रेष्ठ

सोने के गोले सा सूरज
धीरे धीरे ऊपर आया
आभा फैली दिशा-दिशा में
किरणों के रथ में आया

इसके आते ही यह धरती
चमचम करती चमक रही
ओढ़े थी जो काली चुनार
अब फूलों से महक रही

बेटे! अपनी आँखें खोलो
सूरज को तुम करो प्रणाम
जागो लालन छोड़ो बिस्तर
बहुत कर लिया है आराम

कलियाँ जागी भौरे जागे
पेड़ और पत्ते भी जागे
चिड़ियाँ जागी चुह-चुह करती
सब ने ही अब बिस्तर है त्यागे