भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सूरीनामी पौधे / सुशीला बलदेव मल्हू

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

धूल में सने
सूरीनामी पौधे
वर्षा की प्रतीक्षा में
धुँधली आँखों से
राह देख रहे हैं।

वर्षा आई
पौधों को हिला-डुला
नहला कर
साफ सुथरा कर गई
पौधे अब
झूम-झूम झुक-झुक
सलामी दे रहे हैं

पर धूल में मिला
सूरीनाम का भविष्य
सदियों से
आँख बिछाए बैठा है
कोई ऋतु तो आए
इस भविष्य को
नहला-धुलाकर
सुनहरा बनाए।