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सृष्टि जब-जब सृजन के गीत गाती है / राकेश पाठक

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उस नवजात के पैरों में पीले फूल गुदे थे
और हाथों में मोरपंख

जब उसने पैर उठाये थे
सरसराती हवा का रंग भी पीले फूल सा खिल गया था

जब हाथ हिलाए तो
व्योम में बादल प्रेमगीत गाते हुए विहँस रहे थे

जब मुस्कुराया तो सबकुछ रुक गया था
यहां तक ईश्वर का मौन भी

सृष्टि जब-जब सृजन के गीत गाती है
सबकुछ थम जाता है.