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से वणजारे आए / बुल्ले शाह

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से वणजारे आए नी माए,
से वणजारे आए।

लालाँ दा ओह वणज करेन्दे,
होक्का आख सुणाए।
लाल ने गहणे सोने सात्थी,
माए नाल लै जावाँ।
सुणिआ हौका मैं दिल गुज़री,
मैं भी लाल ल्यावाँ।
इक्क ना इक्क कन्नाँ विच्च पा के,
लोक्काँ नूँ दिखलावाँ।
लोक जानण एह लालाँ वाली,
लइआँ मैं भरमाए।

से वणजारे आए नी माए,
से वणजारे आए।

ओड़क जा खलोती ओहना ते,
मैं भनों सद्धराइआँ।
भाई वे लालाँ वालिओ मैं वी,
लाल लेवण नूँ आइआँ।
ओहनाँ भरे संदूक विखाले,
मैनूँ रीझाँ आइआँ।
वेक्खे लाल सुहाणे सारे,
हक्क तो हक्क सवाए।

से वणजारे[1] आए नी माए,
से वणजारे आए।

भाई वे लालाँ वालिआ वीरा,
एहना दा मुल्ल दसाईं।
जे तूँ आई हैं लाल खरीदण,
धड़ तों सीस लुहाईं।
डम्ह[2] कदी सुई दा ना सहिआ,
सिर कित्थों दित्ता जाई।
लाज़मी होके घर मुड़ आई,
पुच्छण गवांढी आए।

से वणजारे आए नी माए,
से वणजारे आए।

तूँ जु गई सैं लाल खरीदण,
उच्ची अड्डी चाई नी।
केहड़ा मुहरा ओत्थों रन्ने तूँ,
लै के घर आई नी।
लाल सी भारे मैं साँ हलकी,
खाली कन्नी साईं नी।
भारा लाला अणमुल्ला ओत्थों,
मैत्थों चुक्किआ ना जाए।

से वणजारे आए नी माए,
से वणजारे आए।

कच्ची कच्च विहाजण जाणा,
लाब विहाजण चल्ली।
पल्ले खरच ना साख ना काई,
हत्थों हारन चल्ली।
मैं मोटी मुशटंडी दिसाँ,
लालाँ नूँ चारन चल्ली।
जिस शाह ने मुल्ल लै के देणा,
सो शाह मुँह ना लाए।

से वणजारे आए नी माए,
से वणजारे आए।

गलिआँ दे विच्च फिराँ दिवानी,
नी कुड़ीए मुटिआरे।
लाल चुगेन्दी नाज़क होई,
एह गल्ल कौण नितारे।
जाँ मैं मुल्ल ओहना नूँ पुच्छिआ,
मुल्ल करन ओह भारे।
डम्ह सूई दा कदे ना खाधा,
ओह आक्खण सिर वारे।
जेहड़िआँ गइआँ लाल विहाजण,
ओहनाँ सीस लुहाए।

से वणजारे आए नी माए,
से वणजारे आए।

शब्दार्थ
  1. व्यापारी
  2. पीड़ा