भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सोचा हुआ कहाँ / प्रमोद तिवारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तेज धूप में
बादल लाऊं
बादल लाने
पर्वत जाऊं
पर्वत की चोटी से
उड़कर
घर-घर
नेह नीर बरसाऊं
सोचा तो यह था
मैंने पर
सोचा हुआ
कहां होता है

दीवारों पर टंगा कलंडर
करता रहता है फर-फर-फर
मैं भी उसकी तरह
हर पहर
काबिज रहूं
समय की गति पर
सोचा तो यह था
मैंने पर
सोचा हुआ
कहां होता है