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सोना चौका चढ़ि किसुन नहाबे / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

दुलहा स्नान कर रहा है। उसकी मंगल-कामना के लिए माँ, बहन और भाभी सूर्य की आराधना कर रही हैं कि उसे कोई नजर न लगा दे।

सोना चौंका चढ़ि किसुन नहाबे।
देखो रे कोई लजर[1] लगाबे॥1॥
माइ तोरअ[2] सिरुज[3] मनाबे।
बहिनी तीरअ सिरुज मनाबे॥2॥
भौजी तोरअ सिरुज मनाबे।
देखो रे कोई लजर लगाबे॥3॥

शब्दार्थ
  1. नजर
  2. तुम्हारा
  3. सूरज; सूर्य