भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सौ बच्चों ने / श्रीप्रसाद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अक्कड़ बक्कड़ बंबे भो
अस्सी नब्बे पूरे सौ
सौ बच्चों ने गाना गाया
बड़ी जोर का शोर हुआ
जैसे अनगिन चिड़ियाँ चहकीं
सूरज आया, भोर हुआ

रंगबिरंगी पोशाकें हैं
मानो सुंदर फूल खिले
एक राग है, एक तान है
गाते हैं सब हिलेमिले

हँसी सभी के चेहरे पर है
बड़ी अजब हैं आँखें भी
सुंदर पोशाकें लगती हैं
बच्चों की हैं पाँखें भी

गाकर गीत सभी ये बच्चे
करते हें गुलजार गगन
एक साथ इतनी आवाजें
सुनकर खुश होता है मन
अक्कड़ बक्कड़ बंबे भो
अस्सी नब्बे पूरे सौ।