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स्काई टूर / रमेश तैलंग

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डोरी से पतंग की चिपकी।
आसमान पर पहुँची मक्खी।
तेज हवा, माथा भन्नाया।
बोली-‘उफ्फोः, मज़ा न आया’।

वापस जब धरती पर आई,
अखबारों में खबर छपाई।
‘यह मेरा स्काई टूर था।
बोर हुई मैं, बहुत दूर था।’