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स्मृति संग लिए / प्रसन्न कुमार चौधरी

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फिर आया यह पथिक
स्मृति संग लिए
अनादि और अनन्त के बीच
अनादि से च्युत अनन्त से अनजान
जन्मने का तथ्य है
जीने का पथ्य है
मरने का कथ्य है
आग और आकाश के बीच
आग से च्युत आकाश से अनजान
धुएं की जिन्दगी है जिन्दगी का धुंआ है
धुंए को काटता धुंआ
धुंए का वर्तुल कब बदल जाता है
एक अदद औरत में
चूल्हे को घेरकर बैठी धुंए में
हजारों सालों से आंखें मींचती खांसती आंचल संभालती धुंए में
कब ढ़ल जाती है औरत
कंटेनरों में
पूरी सभ्यता को सहेजती संभालती संवारती धुंए में
धुंए में धुंए को धुंए से काटती
कितना फासला तय करती है सभ्यता
आग से च्युत आकाश से अनजान
बूंद की जिन्दगी है सभ्यता
फिर भी
आज इस धुंए की धंुध में भी आग की तासीर है
आवारा बूंद में भी किसी आदिम जल की प्यास है
द्वैत सभ्यता में भी किसी अद्वैत स्मृति की छाया है
हां स्मृति
आदिम आग की
आदिम जल की
आदिम शिश्न की ...................
यह अन्तहीन आदिम की अनादि है
यह अन्तहीन अन्त ही अनन्त है
यह अन्तहीन च्युत ही अच्युत है....................
स्मृति थी
स्मरमुपास्स्वेति...............1
स्मृति थी और कुछ भी स्मरण नहीं था@ कोई मेमोरी नहीं थी
बस अनन्त की स्मृति थी अनन्त की प्रतिकृति थी
सबद ऩुस्तिकारू5 प्रसन् न कुमार चौधरी की लम् ब कवििा 44
शरीर की शहादत@ शब्द की आहुति@ मन की बलि के बाद
स्मृति थी स्मृति के साथ लौटना था................
त एतदेव रूपमभिसंविशन्त्येतस्माद्रूपादुद्यन्ति......................2
सभ्यता इसी स्मृति से परावर्तित होकर संस्कृति बनती थी
मनुष्य इसी स्मृति से गुजकर संस्कारवान बनता था
अनुभूति इसी स्मृति से जुड़कर कविता बनती थी ................



संदर्भ
I
साधो, अशब्द-साधना कीजै
1. ‘...............धियो यो नः प्रचोदयात, ’ ऋग्वेद, 3@62।
2. लिलाजन-निरंजना नदी का वर्Ÿामान नाम।
3. ‘यत् पुरूषेण ..................शरद्धविः।।,’ ऋगवेद, 10@90।
4. ‘यो वः ........................मातरः ।।,’ (जो तुम्हारा कल्याण रस है उसे स्नेहवती माता की तरह हमें प्रदान करो),’ ऋग्वेद, 12@9।
5. ‘आस्था की कोख ...............चमत्कार,’ गेएठे, ‘फॉस्ट’।
6. ‘जिज्ञासया ..............सूचयति,’ भामती, वाचस्पति मिश्र।
7. ‘वह आत्मा कहां है..................विलिन हो जाती है,’ वृहदारण्यक उपनिषद, 4@5@12 और 4@5@13।

II
मन एव मनुष्याणां
1. एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (एटीपी) ः तमाम जीवन प्रक्रियाआंें में ऊर्जा के स्थानान्तरण और उपयोग के लिए जिम्मेवार एक अणु।
2. डीआक्सीराइबो न्यूक्लिअक एसिड (डीएनए) ः जीवित कोशिकाओं के एक महत्वपूर्ण रसायन न्यूक्लिओप्रोटीन्स की एक मूलभूत इकाई जिसके एक अणु में परमाणुओं के दो मिलते-जुलते धागे (स्ंिट्रग) स्पिं्रगनुमा आकार में एक दूसरे से गुंथे होते है, ये ही अपनी प्रतिकृति गढ़नेवाले परमाणु हैं।
3. कमला ः उŸार बिहार की एक नदी जो प्रायः अपना मार्ग बदलती रहती है पहले जीववत्सा (जीवछ) नदी के मार्ग पर बहती थी और जीवछ-कमला कहलाती थी अब बलान के मार्ग पर बहती है और कमला-बलान कहलाती है।
4. ‘न वै स़्त्रैणानि ...........हृदयान्येता’, ऋग्वेद, उर्वशी-पुरूरवा संवाद, 10@95@15। भावार्थ ः ‘स्त्रियों की मित्रता (स्थाई) नहीं होती, उनके हृदय सालावृकों (लकड़बग्घों) के (हृदय) हैंं।’
5. ‘अर्धम-मिथ्या ...............नित्य यातना,’ पुराणों में वर्णित कलि की वंशावली।
6. कमला महाविद्या ः दस महाविद्याओं -काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला - में अन्तिम महाविद्या।
7. ‘सुभगः सुन्दरतरो .................ललिताकृतिः’, शिवपुराण, रूद्रसंहिता।
भावार्थ ः ‘यह सौभाग्यशाली बालक अत्यन्त सुन्दर था, उसका मुख हाथी का-सा था। उसके शरीर का रंग लाल था, उसके मुखमंडल पर अत्यन्त प्रसन्नता खेल रही थी। उसकी कमनीय आकृति से सुन्दर प्रभा फैल रही थी,’।
8. ‘प्रीति..............पीयमान’, कालिदास, मेघदूत, पूर्वमेघ ।।16।।
भावार्थ ः ‘ग्रामवधूटियां भांैहे चलाने में भोले, पर प्रेम से गीले अपने नेत्रों में तुम्हें भर लेंगी’।
9. ‘एण्ड वी फ्लोट...........लीजेण्ड,’ यूरिपीडिज (480-406 ई0 पू0), हिप्पोलाइटस।
भावार्थ ः ‘और हम किंवदन्तियों के बहाव में बहे जा रहे है’।
10. एफ्रोदिते , प्रेम की देवी (ग्रीक)।
11. एतावद्वा इदं सर्वम .............वृहदारण्यक उपनिषद, 1@4@6।
भावार्थ ः ‘जगत में यही दो चीजे हैं- अन्न और अन्न का उपभोग करनेवाले ’।
12. बैस्तील ः बैस्तील के पतन से ही 1789 में फ्रांसीसी राज्यक्रांति शुरू हुई।
ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्रू5 ण्ण्ण्ण्ण्ण् ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण् ण्ण्ण् ण् ण्ण्ण्ण्ण् 46
पीटर्सबर्ग ः रूसी क्रांति के दौरान बोलशेविकों का केन्द्र।
चिङकाङशान ः माओ के नेतृत्व में चीनी कम्युनिस्टों का पहला आधार-क्षेत्र।
दिएनबिएनफू ः वियतनामी कम्युनिस्ट छापामारों ने 1954 में दिएनबिएनफू की लड़ाई में फ्रांसीसियों को निर्णायक शिकस्त दी थी।
दोइ मोइ ः बाजार अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए आर्थिक नवीकरण का मौजूदा वियतनामी कार्यक्रम।
13. श्रम का चतुर्आयामी रूप ः श्रम का भौगोलिक विस्तार, श्रम का काल में विस्तार, तकनालाजिकल नवीकरण के जरिए श्रम का विकास, और श्रम तथा श्रम-प्रबंधन सम्बन्धी सिद्धान्तों का विकास।
14. कार्लोस गार्डेल ः टैंगो (नृत्य, उत्पत्ति ः अर्जेण्टीना) के महानतम प्रणेताओं में से एक। उन्होने साढ़े छः सौ से भी अधिक जिंगल्स रचे थे।
सायमा झील ः फिनलैण्ड की सबसे बड़ी झील।
सेविल ः स्पेन में, यहां का विल्क शॉल प्रसिद्ध है, यह डॉन जुआन की जन्मभूमि भी मानी जाती है
डॉन जुआन ः स्वच्छन्द प्रकृति का एक मिथकीय (स्पेनी) पात्र।
जोविक ः नार्वे में, विश्व का पहला भूमिगत आइस हॉकी स्टेडियम जिसका निर्माण 1994 के शीतकालीन आॅलम्पिक खेलों के लिए किया गया।
15. ‘नोरोजोनोम ................................नमोगा,’ एक मुंडारी लोकगीत। भावार्थ ः मानवजीवन दो दिनो का है, इसलिए प्रेम के साथ हंस बोल लेना चाहिए। हे प्रिय यह जीवन फिर नहीं मिलेगा...........यह जीवन नहीं बदला जा सकता। कुम्हार का घड़ा टूट-फूट जाने पर कुम्हार के पास नहीं आता, उसी प्रकार, हे प्रिय, यह जीवन लौट नहीं सकता।
16. बस सिंटेक्टिकल सवाल थे ः यहां संकेत पश्चिम में प्रचलित उस चिन्तन शाखा से है जिसका प्रतिनिधित्व मुख्यतः रूडोल्फ कार्नेप और ‘वियेना सर्कल’ करते हैं। कार्नेप के अनुसार, दर्शन का मुख्य कार्य वाक्य-विन्यास (सिनटैक्स) का अध्ययन करना है।
17. ‘अय सर ...........’ ः विलियम शेक्सपीयर, टेम्पेस्ट। भावार्थ ः ‘श्रीमन्, यह अन्तर्मन कहां
है ? मुझे तो अपने दिल में कहीं भी इस देवता का भान नहीं होता’।
18. ओसिरिस ः प्राचीन मिस्र के देवता जो पाताललोक में रहते थे और मृतकों की आत्मा के
कर्माें-दुष्कर्माें का फैसला करते थे।
सुखावती का अमिताभ ः महायान बौद्ध त्रिकाया सिद्धान्त में विश्वास रखते हैं -धर्मकाया, संभोगकाया और निर्माणकाया। इस लोक से जुड़ी धर्मकाया ही अमिताभ हैंं जो सुखावती में विराजते हैं। निर्माणकाया सिद्धार्थ गौतम के रूप में इस धरती पर आयी।
दीना-भद्री ः दो भाई, बिहार के सबसे दलित समुदाय मुसहरों के मिथकीय नायक।
19.‘दैन डु यू ................चिल्ड्रेन’ ः वर्जिल, एनीड, बुक फोर्थ।
भावार्थ ः ‘ ओ टायर के निवासियों, तो तुम सब अब युगों-युगों तक अपनी तमाम नफरत के साथ उसके बोए बीज का अनुसरण करो..............राष्ट्रों के बीच अब कोई मुरव्वत और मेलजोल न रहे........................मैं तट की तट से, लहरों की जल से, तलवार की तलवार से शत्रुता का आह्वान करती हूं , उनके ये झगड़े पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहें...........’।
20. ‘कंग्रीगेशन आॅफ .............डिसीट’ ः पूरा उद्धरण इस प्रकार है ः ‘फार दि कंग्रीगेशन आॅफ
हिपोक्रिट्स शैल बी डिसोलेट, एण्ड फायर शैल कंज्यूम द टेवरनैकल्स आॅफ ब्राइबरी। दे कन्सीव मिस्चीफ, एण्ड ब्रिंग फोर्थ वेनिटि, एण्ड देअर बेली प्रिपेयरेथ डिसीट’। भावार्थ ः ‘पाखण्डियों की मंडली वीरान होगी, और आग रिश्वतखोरी के तंबुओं को जलाकर राख कर देगी। वे झगड़े उकसाते है, घमंड दिखलाते हैं और उनके पेट में तो छल-कपट ही पकता रहता है’। होली बाइबल, किंग जेम्स वर्सन, द बुक आॅफ जोब, 15@34-35।

21. टी-ब्रेक में प्रयुक्त अंग्रेजी अंशों का भावार्थ ः
ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्रू5 ण्ण्ण्ण्ण्ण् ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण् ण्ण्ण् ण् ण्ण्ण्ण्ण् 47
‘मां, मैं जानती हूं@जानती हूं, मां@तुम्हें मेरा मिलना-जुलना@मेरा चाल-चलन@कुछ भी नहीं भाता@नहीं लगते अच्छे मेरे दोस्त@लेकिन मां@किसने कहा तुमसे@तुम्हारी बूढ़ी, खूसट पीढ़ी का करती हूं मैं मान-सम्मान ?
असल चीज है यह हाड़-मांस की देह@बाकी सब तो क्षणभंगुर हैं@काम में चुस्ती और निपुणता का राज क्या है@जानती हो@पेट का भरा होना और@तृप्त होना अपनी कामवासना का
मां, मानवजाति तो स्वभाव से ही स्वछंद है @ दो, तीन, चार-चार शादियां करते हैं लोग अपने जीवन काल में@और विवाह-पूर्व और विवाहेतर सम्बन्धों के क्या कहने@यहां-वहां स्त्रियों ओर पुरूषों के समलैंगिक क्लब हैं@दुष्कर्म हैं@बलात्कार हैं@कामोŸोजक श्रव्य-दृश्य उपकरण हैं@और मां, बाजार में तो फुलानेवाली आदमकद गुड़िया भी बिकती है
मां, जानवरों से भी गया-बीता है मानवजाति का यौनाचार@और अपनी स्वाभाविक वृŸिायों का दमन@जन्म देता न जाने कितनी व्याधियों और ग्रंथियों को@ईडिपस, इलेक्ट्रा, यमी, भीष्म...........@मानसिक उलझने हैं, स्नायुरोग हैं, परपीड़क ओर परपीड़ित कामुकता है@या फिर दोनों से ग्रस्त लोग हैंं@मनोरोग हैं@फल-फूल रही है मनोचिकित्सकों की एक पूरी जाति@हमारे पाखण्डों पर@पाप और दण्ड की हमारी झूठी चेतना पर
उसी तरह मां@कपड़े भी, हमारी सभ्यता की तरह, पाखण्ड की शुरूआत हैं@हर कोई जानता है कपड़ों के पीछे क्या है@पर्दा इसलिए पाखण्ड है, पाखण्ड@पर्दादारी के साधन नहीं हैं कपड़े@वे तो अपनी देह को और आकर्षक अंदाज में दिखाने का माध्यम हैं@मौके, मौसम और मिजाज के अनुरूप@प्राकृतिक छटा और अपने देहाकार से मेल बिठाते हुए@पहना जाता है वस्त्र@और यह पहननेवाले पर निर्भर है कि वह क्या दिखाये@वक्ष@कटिरेखा@या फिर जांघों का जंगल
आइल आॅफ द मैन और केमैन आइलैण्ड्स के टैक्समुक्त स्वर्ग की तरह@मानवजाति ने न मालूम कितने दिनों से बना रखा है अपना यौन-स्वर्ग@मैं खुद अभी ल’ ट्रेपीज से आ रही हूं, मां
छŸाीस चैबीस छŸाीस का बस काम-प्रतीक बन रखा है पुरूषों ने हमें@पर देखो मां,
हमने उनका क्या किया ?@बस छŸाीस (शिश्नों) में सीमित कर दिया है हमने
उन्हें@चॉपर, लव ट्रंचन, डोंगर, ज्वॉय स्टिक, ऐसे ही कुछ..................
कृत्रिम गर्भाधान का युग आन पहंुचा है, मां@छुटकारा पा चुके हैं हम गर्भ-धारण
करने के बोझिल काम से@विवाह की संस्था को अलविदा कहने का वक्त आ गया
है@बेमानी है उŸाराधिकार का प्रश्न, मां@कोई किसी का उŸाराधिकारी नहीं होता@हर कोई खुद अपना स्रष्टा है@जमाना गया, मां, भावनात्मक रिश्तों-नातों का
देखो मां@झूठे, आत्म प्रवंचक प्रेम कहानियां लिखने में@प्रेमगीत पढ़ने में@
प्रेम नाटकों के मंचन में@सामाजिक रूप से आवश्यक कितना श्रमकाल नष्ट किया
हमने@इतने श्रमकाल में हम तो मंगल ग्रह पर अपनी कॉलोनियां बसा सकते थे
मां, सच-सच बताना@अपने जीवनकाल में@तुम्हारे कितने विवाहेतर सम्बन्ध
बने@अपना भेद मुझे भी बतलाओ@ज्ञान दो अपनी बेटी को@अब मैं
तुमसे स्वतंत्र हूं@और सबकुछ से@बोलो न मां, भोली मत बनो@ इस
आजादी की तुम भी तो भागीदार बनो@एक जैविक जरूरत है यौनाकंाक्षा@
हम सब में छुपी एक मूल वृŸिा@कुछ रसायनों का कमाल@ और बस इतना
ही मां
क्या मैं गंदी बातें कर रही हूं ?@नहीं मां, नहीं@अश्लीलता तो मैकाले के
जमाने से ही देसी भाषाओं के खाते रख छोड़ी जा चुकी है@अंग्रेजी में कुछ भी अश्लील नहीं
लेकिन मैं पतिता नहीं हूं, मां जानवरों की इस दुनिया में भी मैं जीना और
फलना-फूलना जानती हूं@रस लेना जानती हूं मैं जीवन का@मैं तो कई
पुरूषें के पतन के पीछे छिपी नारी होना चाहती हूं
लेकिन मां, तुम जवाब क्यों नहीं दे रही ?
प्रिय, तुम्हारी मां मर चुकी है@मृत्यु ही उसका जवाब है
नहीं, ...................
............................
एक नाता टूट गया@तुम अपनी मां से आजाद हो@अब तुम्हारी मां तुमसे
आजाद है@एक संवाद टूट गया@तुम्हारी चीख ही आखिरी बात थी
हां प्रिय, तुम्हारी मां मर चुकी है@लेकिन याद रखना, मां एक मृत्युहीन श्रेणी है
क्या तुम संस्कृत में बातें कर रहे हो@इससे तो सचमुच मुझे उबकाई आती है @
यह मुझे बनारस के तोंदियल पंडों की@कोढ़ियों और भिखमंगों की@ चारो
ओर फैली गंदगी और बदबू की याद दिलाती है@नफरत करती हंू मैं इस
भाषा से
लेकिन अगर तुम इस भाषा से परिचित हाती@तो यह तुम्हें खूब भाता@कामसंवेगों
की सबसे शक्तिशाली भाषा है यह
मेरी मां मेरी मां
हां वह अब नहीं है@उदात्त है उनकी मौत@और तुम्हारी बगावत ?@ उसका
कहना ही क्या@प्रिय, कोई मुर्दा हकीकत नहीं है मृत्यु@वह तो एक जीवन्त
कर्ता है@और बगावत और मृत्यु का सम्मिश्रण है हमारा अस्तित्व@इस बगावत
पर सोचो और इस मृत्यु पर भी@इस पर सोचो प्रिय, सोचो
’ल’ ट्रेपीज, न्यूयार्क का एक प्रसिद्ध सेक्स क्लब।
’चॉपर, लव टंªचन ............’ ब्रिटेन से प्रकाशित महिलाओं की एक पत्रिका
‘कम्पनी’ ने अपने आवरण पृष्ठ पर छŸाीस किस्म के शिश्नों की तस्वीरें
छापी थीं और उनका अलग-अलग नामकरण किया था। उन्हीं में से
कुछ नाम।

22. ‘द साइलेन्स आॅफ द लैम्ब्स’, वीभत्स विकृतियों की विषयवस्तु पर आधारित
एक फिल्म। इस फिल्म में अभिनय के लिए एंथॉनी हॉपकिन्स को सर्वश्रेष्ठ
अभिनेता का आॅस्कर अवार्ड मिला।

23. एल डोराडो, कांदिद, कुनेगुन ः वाल्तेयर, ‘कांदिद, आॅर दि आॅप्टिमिस्ट’।
एल डोराडो ः वाल्तेयर द्वारा वर्णित एक यूटोपिया, एक काल्पनिक प्रदेश जहां अपार वैभव है और असीम सुख-शान्ति है। धरती के इस स्वर्ग में भी कांदिद को अपनी प्रेमिका कुनेगुन की अनुपस्थिति सताती है। सबकुछ है पर कुनेगुन नहींं। प्रेमिका नहीं तो स्वर्ग का भी क्या सुख ? अन्ततः वह एल डोराडो से भी निकल भागता है -- कुनेगुन की खोज में।

24. ‘हैंग अप फिलॉसॅफी ...............’ विलियम शेक्सपीयर, ‘रोमियो एण्ड जूलियट’।
भावार्थ ः ‘फलसफा यदि जूलियट पैदा नहीं कर सकता तो उसे शूली पर
चढ़ा दो ’।

25. गंगा ः गंगादेवी (दिवंगत), मधुबनी चित्रकला की एक प्रसिद्ध कलाकार।
कोहबार, जीवन-चक्र ः मधुबनी चित्रकला की कृतियां। अहिबातक दीप
इसी चित्रकला का एक प्रतीक। चित्रकारी को मैथिली में लिखना कहते हैं।
26. ‘माधव...............रूप‘, विद्यापति पदावली से।
27. ‘हैलो ब्राइटनेस .................. अगेन’। भावार्थ ः ‘ऐ ज्योतिपंुज, कितना पुराना
सम्मोहन का नाता तुमसे, लो आ गया गप्पें मारने फिर से’। तुलनीय ः
‘हैलो डार्कनेस, माई ओल्ड फे्रंड, आइ हैव कम टु टॉक विद यू अगेन,’
पॉल सिमोन और आर्ट गरफंुकेल का एक गीत (साउण्ड्स आॅफ साइलेंस)।
भावार्थ ः ऐ तिमिर, मीत पुराने, लो आ गया मैं, फिर गप्पें मारने’।
28. ‘देयर बी थ्री टाइम्स .............‘पूरा उद्धरण इस प्रकार है ः देअर बी थ्री
टाइम्स, डिक, व्हेन नो वूमेन कैन स्पीक, ब्यूटीफुल टाइम्स। व्हेनेवर हियर्स हर लवर,
एण्ड व्हेनेवर गीव्स हरसेल्फ, एण्ड व्हेनेवर लिट्ल वन इज
बॉर्न। यू - यू वुड हैव बीन द फस्र्ट टू स्टॉप मी इफ आइ वुड हैव स्पोकन
देन। भावार्थ ः तीन क्षण होते है, डिक, जब कोई स्त्री कुछ नहीं बोलती,
खूबसूरत क्षण। जब वह अपने प्रेमी को सुन रही होती है, जब वह खुद को
समर्पित कर रही होती है, और जब नन्हा शिशु जन्म लेता है। हां, तुमने ही
मुझे चुपकर दिया होता अगर उस क्षण मैंने कुछ कहने की कोशिश की होती।
जॉन मेसफील्ड, ‘द ट्रेजडी आॅफ नान’।
29. पी बटे ई अनुपात ः शेयर बाजार की एक प्रचलित शब्दावली। यह
शेयरों की बाजारू कीमत और प्रति शेयर आय का अनुपात है।
30. ‘परो हि............समाधिः’ ः श्रीमद्भागवत, 11@23@46। भावार्थ ः
‘मन का समाहित हो जाना ही परम योग है’।
31. ‘सत्यं, दया ........पाण्डव’, श्रीमद्भागवत, 7@11@8-12। भावार्थ ः सत्य, दया,
तपस्या, शौच, तितिक्षा, आत्म-निरीक्षण, ब्राह्य इन्द्रियों
का संयम, आन्तर इन्दियों का संयम, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, त्याग,
स्वाध्याय, सरलता, सन्तोष, समदृष्टि, सेवा, दुराचार से निवृŸिा,
लोगों की विपरीत चेष्टाओं के फल का अवलोकन, मौन, आत्मविचार,
प्राणियों को यथायोग्य अन्नदानादि, समस्त प्राणियों में विशेषकर
मनुष्यों में आत्मबुद्धि ...........(युधिष्ठिर से नारद)।


III
स्मृति संग लिए
1. ‘स्मरमुपास्स्वेति’, छांदोग्य उपनिषद, 7@13, भावार्थ ः ‘स्मृति की उपासना करो’।
2. ‘त एतदेव........................’, छांदोग्य उपनिषद, 3@6@2। भावार्थ ः ‘ इस
रूप में वे खो जाते हैं, इस रूप से वे प्रकट होते हैंं’।