भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हँसी ओ हँसी! / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हँसी ओ हँसी!
तू कहाँ खो गई?

फूलों के चेहरों पर
ढूँढा तुझे।
पेड़ों पर, पत्तों पर
ढूँढा तुझे।
घर में भी तेरा
अता न पता।
उड़नछू हुई तू
कहाँ पर बता!

शहर का धुआँ
क्या तुझे खा गया?
या कोई गुस्से में
डरपा गया।
जहाँ भी है जल्दी से
अब लौट आ।
उदासी ने घेरा है
हमको हँसा।