भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हमारा गणतन्त्र / शैलजा पाठक

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चिरई गाँव के प्राथमिक पाठशाला
में बच्चे सफाई में जुटे हैं
ईटा पे गेरू लगा कर सब साफ़ सुफ़
कल गणतन्त्र दिवस पर सभी को
एक लड्डू एक समोसा देने वाले हैं

सबसे परेशां मिसिर गुरु जी है
रंगारंग कार्यक्रम की जिम्मेवारी है उनपर
अब कोई लड़की इस साल भारत माता
बनने को तैयार नही
अब उन्हीं को केंद्र में रख कर
सारी बात सारा शपथ तो लेना है

लड़कियों ने निर्णय ले लिया है
हर साल का मजाक है
कभी भारत माता को टुटा हुआ दिखाना है
कभी झुका हुआ कभी चोट खाया कभी रक्तरंजित
कभी तार तार अस्मिता
इस बार एक सावली लड़की
को भारत माता बनाते तो फीलिंग उभर कर आता
पर इस बार लड़कियों की फीलिंग जाग गई है
सूखी नदी दरकते पहाड़ फटे कपडे पहन कर भ्रस्टाचार
गरीब का रोल अब हम नही करेंगे
हर साल आपका लिखा एक जैसा भाषण भी नही बोलेंगे

नहीं गुरु जी कल हम सब नही आयेंगे
अम्मा तो कहती रही भारत माता को
खूब चटक पिली साडी में खूब गहना पहनाकर
ये बड़ा टिका लगाकर सब रंगबिरंगा नाच करते थे
हरियाली खुशहाली का गीत गाते थे

हमे भी खूब नाचना है पाउडर लाली लगा कर

उस तीन रंग के नीचे रंग रंग हो जाना है गुरु जी...