हमारी कविताएँ अभी प्रकाशित नहीं हो सकतीं ।
वे हाथ-दर-हाथ बढ़ाई जाती हैं, लिख कर
या साइक्लोस्टाइल हो कर । लेकिन एक दिन आएगा, बहरहाल,
जब उस तानाशाह का नाम जिस पर वे चोट करती हैं
भुला दिया जाएगा,
और वे उसके बाद भी पढ़ी जाती रहेंगी ।
हमारी कविताएँ अभी प्रकाशित नहीं हो सकतीं ।
वे हाथ-दर-हाथ बढ़ाई जाती हैं, लिख कर
या साइक्लोस्टाइल हो कर । लेकिन एक दिन आएगा, बहरहाल,
जब उस तानाशाह का नाम जिस पर वे चोट करती हैं
भुला दिया जाएगा,
और वे उसके बाद भी पढ़ी जाती रहेंगी ।