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हम कहकशां की हद से भी आगे निकल गये / रमेश तन्हा

साँचा:KKCatTraile

 
हम कहकशां की हद से भी आगे निकल गये
डूबे कभी जो अपने ख़यालों के ग़ार में

जितने पड़ाव राह में आये फिसल गये
हम कहकशां की हद से भी आगे निकल गये
कितने हसीन ख़्वाब हक़ीक़त में ढल गये

नश्शे को ज़िन्दगी मिली गोया ख़ुमार में

हम कहकशां की हद से भी आगे निकल गये
डूबे कभी जो अपने ख़यालों के ग़ार में।