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हम मक़सद के दीवाने हैं मियाँ हमारी बात न कर / कांतिमोहन 'सोज़'

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हम मक़सद के दीवाने हैं मियाँ हमारी बात न कर I
अपने लिए जेलख़ाने हैं मियाँ हमारी बात न कर ।।

मुश्किल भी हैं पेचीदा भी जंगो-मोहब्बत के पहलू
लेकिन हमको सुलझाने हैं मियाँ हमारी बात न कर I

हँस-हँसकर जल जाएँगे हम हमको ख़ौफ़ दिखाना क्या
परवाने तो परवाने हैं मियाँ हमारी बात न कर I

बड़े घमण्डी शहज़ोरों से जंगख़ोर शहबाज़ों से
हमें मामले लड़वाने हैं मियाँ हमारी बात न कर I

अपने जौहर अपने तेवर अपना दम अपना कसबल
सबके जाने-पहचाने हैं मियाँ हमारी बात न कर ।।