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हल्दी गीत / छत्तीसगढ़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

एके तेल चढ़गे कुंवरि पियराय।
दुए तेल चढ़गे महतारी मुरझाय।।
तीने तेल चढ़गे फुफु कुम्हलाय।
चउथे तेल चढ़गे मामी अंचरा निचुराय।।
 
पांचे तेल चढ़गे भइया बिलमाय।
छये तेल चढ़गे भऊजी मुसकाय।।
साते तेल चढ़गे कुवरि पियराय।
हरदी ओ हरदी तै सांस मा समाय।।
तेले हरदी चढ़गे देवता ल सुमुरेव
'मंगरोहन' ल बांधेव महादेव ल सुमरेंव।।