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हाइकु 21-44 / सरस्वती माथुर

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21
भूली सी यादें
दिल की किताब में
पीले पन्ने -सी
22
कच्चे ख्वाब- सा
आता -ज़ाता मौसम
धूप -छाँव- सा
23
भूरी पत्तियां
पतझर लायी है
पेड ठगा -सा
24
झरना बहा
पहाड़ी पगडंडी
फैला नदी सा
25
प्रवासी पक्षी
ठंडी झील में आये
मौसम बदला
26
हाथ हिलाता
चौखट पर सूर्य
जागी चिड़िया
27
पीले से पात
ऋतु के द्वार पे
रुका बसंत
28
झाँकते तारे
नभ के कँगूरे से
टॉर्च फेंकते
29
बंद मुट्ठी से
अनमने रिश्ते हैं
खुलते नहीं
30
मेहँदी लगी
साँझ- हथेली पर
रंग ले आई
  31
तारों की रात
अमावस की बेला
भीगी रजनी
   32
कोयला दिन
अँगीठी में सुलगा
राख़ हो गया ।
33
खुली मुंडेर
ऋतु से बतियाता
अमलतास
34
धूप -लहरें
माणिक बरसाता
गुलमोहर
35
श्वेत चूड़ियाँ
भरके कलाइयाँ
सजी शेफाली
36
सूरजमुखी
पौधे के झरोखे से
सूर्य निहारे
37
हवा में घुल
गुलाब के फूल भी
'खुशबू बने
38
मोगरे दाने
चुनता हवा पाखी
चोंच मारके
39
उनींदा दिन
सफ़ेद गुलाब से
रंग ले भागा
40
हवा तितली
मोगरे का रस पी
गंध ले उडी
41
खोल सी गयी
सूरजमुखी धूप
सूर्य की आँखें
42
कच्चे घड़े से
पारिजात टूटे थे
पाखी से उड़े
43
चाँदनी आई
शेफाली को ओढ़ाई
श्वेत चूनर
44
सफ़ेद चोला
ओढ़ हरसिंगार
खिला महका
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