भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हालात के लिहाज से ऊँचाइयाँ मिलीं / विकास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हालात के लिहाज से ऊँचाइयाँ मिलीं
लेकिन खुली किताब तो रुसवाइयाँ मिलीं

ज़िन्दा नहीं रहा कोई लाशों की भीड़ में
सरहद के पास क्या कभी शहनाइयाँ मिलीं

चलती रही हवा कभी बादल को देखकर
गर चल पड़ी तो फिर उसे पुरवाइयाँ मिलीं

रातों को गर चला कभी तन्हा नहीं हुआ
चलता रहा तो मैं मुझे परछाइयाँ मिलीं

कह के गई है फिर नदी कश्ती को छोड़ जा
सागर के जैसी फिर मुझे गहराइयाँ मिलीं