भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हिन्दी भाषा का रुतवा / प्रभुदयाल श्रीवास्तव

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जब गुड़िया कापी में लिखती ,
    क, ख, ग, घ, च, छ ,ज |
    हंसकर सबको बतलाती है ,
    हिन्दी भाषा का रुतवा |

    मजबूरी में जब अंग्रेजी ,
    में ए. बी .सी .डी लिखती |
    हारी हारी थकी थकी सी ,
    सूखे पत्ते सी दिखती |

    गुस्से में कहती है मुझको ,
    हिन्दुस्तानी पढ़ना है |
   अंग्रेजी भाषा से मुझको ,
   अभी नहीं माँ जुड़ना है |